हैदराबाद एनकाउंटर पर कांग्रेस युवा नेता संजय अजगल्ले का बयान
रायपुर- युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महामंत्री व जिला युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष संजय अजगल्ले ने विगत दिनों हुए एनकाउंटर पर अपना बात रखते हुए कहा कि हैदराबाद का मामला हो या उन्नाव का मामला, पुलिस प्रशासन ने अपनी प्रारम्भिक जिम्मेदारी नही निभाई। अगर निभाई होती तो शायद हालात कुछ और होते। ऐसे ही अनेकों मामलों में पुलिस संवेदनशील नही होती, चाहे तो अपने आसपास देख लीजिए। फिर अपनी इसी नाकामी को छुपाने दबाने और सस्ती लोकप्रियता केलिए एनकाउंटर/extra judicial killings का सहारा लेती है। ताकि अपनी जवाबदेही और जिम्मेदारी से बच सके। याद रखिये एनकाउंटर हैप्पी एंडिंग नही है, बल्कि यह अराजकता की ओर ले जाता रस्ता है। कल एक एनकाउंटर हुआ आज 100 की मांग है फिर 1000 की उठेगी और व्यवस्था चरमरा कर गिर जाएगी।
संजय अजगल्ले ने बताया कि-
जिम्मेदारी से भागना और शॉर्टकट निकालना समाधान नही है, बल्कि समाधान है कि जिम्मेदारियों का सही से निर्वाहन करना। जिसमे पुलिस का काम है पूरे साक्ष्य सबूत जुटा कर आरोपी को कानून के कटघरे में लाना, और अदालतों का काम है जल्द से जल्द आरोपी गुनहगार है या नही यह तय करना।
आज जरूरत व्यवस्थाओ को मजबूत करने की है न कि उनको तोड़ कर खत्म कर देने की।
संजय अजगल्ले ने आगे बताया कि उन्नाव कांड पर पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया था। तीन माह बाद कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ।
हैदराबाद में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के आरोपीयों के पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मार गिराए जाने की घटना से देश में जीस तरह की प्रतिक्रिया हुई उसे कानून के राज में जायज़ तो नहीं कहा जा सकता मगर इस प्रतिक्रिया ने हमारी अपराधिक न्यायिक प्रणाली पर जनता का असंतोष अवश्य ही कहा जा सकता है।
संजय अजगल्ले ने आगे कहा कि इस घटना के बाद ऐसा लग रहा है मानो कि लोगों को अब न तो न्यायपालिका की और ना ही कानून बनाने वाली विधायिका की जरूरत रह गई है।
सवाल यह भी उठता है कि क्या हम गांधीवाद से प्रेरित लोकतंत्र से भटक कर इटली के मैकियावेली, युनानी दर्शानिक गांडविन एवं जर्मनी के मैक्सस्टर्नर के अराजक राजनीतिक दर्शन की ओर बढ़ रहे हैं।
अगर ऐसा है तो वह भी हमारी व्यवस्था की नाकामयाबी है।
संजय अजगल्ले ने कहा कि अपराधियों में कानून का भय अवश्य होना चाहिए। लेकिन कानून के हिसाब से।
आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते कानून के हिसाब से वैसे भी उन्हें फांसी मिलता।
संजय अजगल्ले ने कहा कि अगर कानून से पहले ही उन्हें बंदूको से मार दोगे तो फिर अदालत, पुलिस और कानून का फायदा ही क्या है।
संजय अजगल्ले ने आगे कहा कि एनकाउंटर पर लोग जश्न जरूर मना रहे हैं लेकिन यह हमारे कानून और विधि व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं?
पुरे देश और समाज को इस बात पर चिंतन करना होगा कि क्रिमिनल और इंवेस्टिगेटिव जस्टिस को दुरुस्त कैसे किया जाए ''
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